होमअपराधJabalpur Cyber Scam: USDT ट्रेडिंग में मुनाफे का झांसा, युवक से 50.67 लाख की कथित साइबर ठगी

Jabalpur Cyber Scam: USDT ट्रेडिंग में मुनाफे का झांसा, युवक से 50.67 लाख की कथित साइबर ठगी

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 सराफा बाजार, जवाहरगंज वार्ड निवासी एक युवक के साथ क्रिप्टो करेंसी USDT ट्रेडिंग के नाम पर कथित तौर पर लाखों
Jabalpur Cyber Scam: USDT ट्रेडिंग के नाम पर 50.67 लाख की ठगी

 सराफा बाजार, जवाहरगंज वार्ड निवासी एक युवक के साथ क्रिप्टो करेंसी USDT ट्रेडिंग के नाम पर कथित तौर पर लाखों रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। पीड़ित के मुताबिक, फेसबुक और वाट्सऐप के जरिए संपर्क में आए लोगों ने उसे क्रिप्टो ट्रेडिंग में अच्छा मुनाफा कमाने का भरोसा दिलाया और बाद में अलग-अलग मदों के नाम पर उससे कुल 50,67,579 रुपये जमा करा लिए।

पीड़ित को कथित साइबर स्कैम का पता तब चला, जब 20 जुलाई 2026 को वह MEXOVAULT प्लेटफॉर्म पर लॉगिन करने पहुंचा, लेकिन उसका अकाउंट लॉगिन नहीं हुआ। इसके बाद उसने साइबर सेल से संपर्क किया। शिकायत के अनुसार, चार दिन थाने के चक्कर लगाने के बाद 24 जुलाई 2026 को उसकी शिकायत दर्ज की गई।

फेसबुक पर महिला ने किया था संपर्क

शिकायत के मुताबिक, 18 जून 2026 को फेसबुक पर चंडीगढ़ सेक्टर-10 निवासी बताने वाली सिमरन शर्मा नाम की महिला ने युवक से मैसेंजर के जरिए संपर्क किया। महिला ने खुद को लेडीज वेयर गारमेंट टेक्सटाइल कंपनी की संचालक और मैक्सोवाल्ट क्रिप्टो ट्रेडिंग कंपनी की फ्रेंचाइजी मालिक बताया।

पीड़ित का आरोप है कि करीब एक सप्ताह तक बातचीत के जरिए विश्वास बनाने के बाद महिला ने उसे क्रिप्टो ट्रेडिंग में अच्छा मुनाफा होने का लालच दिया।

ट्रेडिंग मेंटर बताकर अरविंद बंसल से कराया संपर्क

शिकायत के अनुसार, 27 जून 2026 को सिमरन शर्मा ने पीड़ित को अरविंद बंसल नाम के व्यक्ति का मोबाइल नंबर दिया और उसे मैक्सोवाल्ट कंपनी का मैनेजमेंट अधिकारी व ट्रेडिंग मेंटर बताया।

इसके बाद पीड़ित को एक ट्रेडिंग वाट्सऐप ग्रुप “इथर्नियम इलाइट” में जोड़ा गया। शिकायत में दिए गए विवरण के अनुसार, ग्रुप में अरविंद बंसल, सिमरन शर्मा, रवि पंडित, “Princess” नाम से सेव नंबर और पीड़ित शामिल थे।

Binance से शुरू हुई ट्रेडिंग, फिर MEXOVAULT पर कराया अकाउंट

पीड़ित के मुताबिक, शुरुआत में उसे Binance क्रिप्टो ट्रेडिंग एप पर अकाउंट खुलवाया गया। शुरुआती ट्रेडिंग के दौरान उसे कोई बड़ी परेशानी नहीं हुई और ज्यादा निवेश भी नहीं किया गया।

इसके बाद वाट्सऐप पर एक लिंक भेजकर उसे MEXOVAULT नाम के प्लेटफॉर्म पर अकाउंट खोलने के लिए कहा गया। आरोप है कि इसके बाद ट्रेडिंग की प्रक्रिया MEXOVAULT प्लेटफॉर्म पर शुरू कराई गई और पीड़ित से ऑनलाइन कॉन्ट्रैक्ट भी साइन कराया गया।

फिर Binance से USDT को MEXOVAULT प्लेटफॉर्म पर ट्रांसफर कराया गया। पीड़ित के मुताबिक, ट्रेडिंग के दौरान उसके अकाउंट में USDT बढ़ता हुआ दिखाई देता था।

20-30 प्रतिशत कमीशन के नाम पर जमा कराए पैसे

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि हर ट्रेड पर 20 से 30 प्रतिशत तक कमीशन USDT के रूप में जमा करने के लिए कहा जाता था। कथित लॉक-इन पीरियड के चलते ट्रेडिंग कैपिटल को तत्काल निकालना संभव नहीं बताया गया।

इसके बाद पीड़ित को ऑफलाइन USDT खरीदकर कमीशन जमा करने के लिए कहा गया। कथित तौर पर बैंक में रकम जमा कराने के बाद उसकी रसीद अरविंद बंसल को वाट्सऐप पर भेजी जाती थी और उसके बाद पेमेंट कन्फर्म होने का संदेश दिया जाता था।

पीड़ित का दावा है कि इस तरह करीब 8 बार ट्रेडिंग और कमीशन से संबंधित लेनदेन किए गए।

बैंक खातों में रकम जमा कराने का आरोप

शिकायत के मुताबिक, खासकर आखिरी चार ट्रेड के दौरान पीड़ित से RTGS और कैश जमा कराने के माध्यम से बताए गए बैंक खातों में रकम जमा कराई गई। शिकायत में एक खाताधारक का नाम मोहम्मद हुसैन, निवासी निलंबुर, केरल बताया गया है।

पीड़ित का आरोप है कि खाताधारक की पहचान के लिए उसे आधार कार्ड और चेक की तस्वीर भी भेजी गई थी। इसके बाद जमा की गई रकम से ऑफलाइन USDT खरीदकर कथित कमीशन के रूप में जमा करने के लिए कहा गया।

सिक्योरिटी वेरिफिकेशन के नाम पर भी मांगी रकम

मामला यहीं नहीं रुका। शिकायत के अनुसार, MEXOVAULT में जमा USDT को वापस Binance पर ट्रांसफर करने के लिए अकाउंट का वेरिफिकेशन कराने की बात कही गई।

इसके लिए पीड़ित से सिक्योरिटी वेरिफिकेशन अमाउंट जमा कराने को कहा गया। अलग-अलग भुगतान और कथित शुल्क के नाम पर जमा की गई रकम मिलाकर पीड़ित के अनुसार कुल नुकसान 50,67,579 रुपये तक पहुंच गया।

20 जुलाई को प्लेटफॉर्म पर लॉगिन नहीं हुआ तो हुआ शक

पीड़ित के मुताबिक, 20 जुलाई 2026 को जब उसने MEXOVAULT प्लेटफॉर्म पर अपने अकाउंट में लॉगिन करने का प्रयास किया तो वह लॉगिन नहीं कर पाया। इसके बाद उसे संदेह हुआ कि उसके साथ साइबर धोखाधड़ी हो चुकी है।

इसके बाद उसने साइबर सेल थाने से संपर्क किया। शिकायत के अनुसार, चार दिन बाद 24 जुलाई को उसकी शिकायत दर्ज की गई।

पुलिस जांच में सामने आएंगे पूरे तथ्य

फिलहाल मामला पीड़ित की शिकायत और उसके द्वारा उपलब्ध कराए गए लेनदेन, मोबाइल नंबर, वाट्सऐप चैट और अन्य दस्तावेजों के आधार पर जांच का विषय है। शिकायत में जिन लोगों और प्लेटफॉर्म का उल्लेख किया गया है, उनकी वास्तविक भूमिका जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

पुलिस के सामने अब यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि रकम किन बैंक खातों में पहुंची, USDT ट्रांजेक्शन किस वॉलेट या पते पर हुए और फेसबुक-वाट्सऐप के जरिए संपर्क करने वाले लोगों के बीच आपसी संबंध क्या थे।

नोट: इस रिपोर्ट में ठगी से संबंधित दावे पीड़ित की शिकायत के आधार पर हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित आरोपियों का पक्ष सामने आना बाकी है।

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