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शिकायतों पर सन्नाटा, अधिकारी की मनमानी जारी! कर्मचारियों ने उठाए सवाल

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जबलपुर के जल संसाधन विभाग में कर्मचारियों की शिकायतों को लेकर अब विभागीय व्यवस्था और अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल
: जल संसाधन विभाग में शिकायतों पर सवाल, कर्मचारियों ने मांगी जांच

जबलपुर के जल संसाधन विभाग में कर्मचारियों की शिकायतों को लेकर अब विभागीय व्यवस्था और अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल उठने लगे हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि प्रभारी अधिकारी मनोज कुमार मुकेश की कार्यप्रणाली को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों से कई बार लिखित शिकायतें की गईं, जिनमें भोपाल स्तर तक शिकायत पहुंचने का भी दावा किया जा रहा है। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं होने से कर्मचारियों में नाराजगी बताई जा रही है।

कर्मचारियों का कहना है कि शिकायतों के बाद स्थिति में सुधार होने के बजाय कथित तौर पर शिकायत करने वाले कर्मचारियों पर ही दबाव बढ़ गया। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप

कर्मचारियों के मुताबिक, प्रभारी अधिकारी की कार्यप्रणाली को लेकर पहले भी वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष शिकायतें रखी गई थीं। इन शिकायतों में कार्यालयीन कामकाज और कर्मचारियों के साथ कथित व्यवहार से जुड़े कई मुद्दे उठाए गए।

कर्मचारियों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि यदि शिकायतों में लगाए गए आरोप गलत हैं तो विभागीय स्तर पर निष्पक्ष जांच कर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

आदेश निरस्त होने के बावजूद मनमानी का आरोप

मामले में कर्मचारियों की ओर से सबसे बड़ा सवाल वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों को लेकर उठाया जा रहा है। कर्मचारियों का दावा है कि प्रभारी अधिकारी द्वारा जारी कुछ आदेशों को वरिष्ठ अधिकारियों ने तत्काल प्रभाव से निरस्त किया था।

इसके बावजूद कर्मचारियों का आरोप है कि जमीनी स्तर पर उन्हीं आदेशों और कथित कार्यप्रणाली का असर दिखाई दे रहा है। कर्मचारियों का सवाल है कि यदि किसी आदेश को वरिष्ठ स्तर पर निरस्त किया जा चुका है तो उसके बाद भी उससे जुड़ी प्रक्रिया या निर्देशों का प्रभाव कैसे बना हुआ है।

नोटशीट और रोजमर्रा के कामकाज को लेकर भी आरोप

कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि नोटशीट और विभागीय पत्रों पर हस्ताक्षर से लेकर रोजमर्रा के कार्यालयीन कामकाज तक उन्हें कथित तौर पर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

कुछ कर्मचारियों का यह भी दावा है कि शिकायत करने के बाद उनके ऊपर दबाव बढ़ा। हालांकि इन आरोपों को लेकर विभाग या संबंधित अधिकारी का पक्ष अभी सामने नहीं आया है। इसलिए आरोपों की वास्तविकता विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

अब सवाल पूरे सिस्टम की जवाबदेही पर

कर्मचारियों की शिकायत अब केवल एक अधिकारी की कार्यप्रणाली तक सीमित नहीं दिखाई दे रही, बल्कि इससे विभागीय निगरानी और जवाबदेही को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

कर्मचारियों का कहना है कि यदि वरिष्ठ अधिकारियों तक शिकायतें पहुंच चुकी हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। वहीं यदि शिकायतों में लगाए गए आरोप सही नहीं हैं तो जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए, ताकि कर्मचारियों और विभाग दोनों के बीच बनी असमंजस की स्थिति खत्म हो।

कर्मचारियों ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग

कर्मचारियों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच में यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की गलती सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

इसके साथ ही कर्मचारियों ने विभाग में ऐसा माहौल बनाए जाने की मांग की है, जहां वे बिना किसी दबाव या भय के अपनी शिकायतें वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा सकें।

अब देखना यह होगा कि कर्मचारियों की लगातार सामने आ रही शिकायतों पर विभाग के वरिष्ठ अधिकारी क्या कदम उठाते हैं और कथित आदेशों एवं कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों पर विभाग की ओर से क्या स्पष्टीकरण सामने आता है।

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