
जबलपुर जिले के मझौली स्थित अन्नपूर्णा वेयरहाउस में गेहूं खरीदी के दौरान सामने आए 1 करोड़ 37 लाख रुपये के फर्जीवाड़े में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। मामले में आरोपी बनाए गए 9 अधिकारियों और कर्मचारियों की संपत्ति बेचकर सरकारी राशि की वसूली की जाएगी। इस कार्रवाई के बाद कई महीनों से भुगतान का इंतजार कर रहे 190 किसानों को उनकी बकाया राशि मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
मामला मझौली क्षेत्र के अन्नपूर्णा वेयरहाउस से जुड़ा है, जहां गेहूं खरीदी के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का खुलासा हुआ था। जांच में गोदाम से 5,167 क्विंटल गेहूं गायब पाया गया, जिसकी कीमत करीब 1.37 करोड़ रुपये आंकी गई। इसके बाद प्रशासन ने मामले की विस्तृत जांच शुरू की थी।
फर्जीवाड़े के कारण गेहूं बेचने वाले करीब 190 किसानों का भुगतान लंबे समय से लंबित है। किसानों को उनकी उपज का पैसा नहीं मिलने से वे आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं। अब प्रशासन की कार्रवाई के बाद इन किसानों को जल्द भुगतान मिलने की संभावना है।
प्रशासन ने आरोपियों से सरकारी राशि की वसूली के लिए रेवेन्यू रिकवरी सर्टिफिकेट (RRC) जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की चल-अचल संपत्तियों की पहचान कर उनकी नीलामी के माध्यम से बकाया राशि वसूली जाएगी।
इस पूरे मामले में जिम्मेदार पाए गए 9 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ पहले ही मझौली थाने में आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जा चुका है। जांच के दौरान फर्जीवाड़े से जुड़े दस्तावेज और रिकॉर्ड भी खंगाले गए थे। मामला गंभीर होने के कारण इसकी जानकारी भोपाल स्तर तक पहुंची थी।
गेहूं खरीदी में हुए इस करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े ने प्रदेश स्तर पर भी सुर्खियां बटोरी थीं। मामले की जानकारी भोपाल तक पहुंचने के बाद संबंधित विभागों ने भी रिपोर्ट तलब की थी। अब प्रशासन दोषियों से राशि वसूलने और किसानों को भुगतान कराने की दिशा में कार्रवाई तेज कर रहा है।
प्रशासन का कहना है कि सरकारी धन के नुकसान की भरपाई के लिए दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों से पूरी राशि वसूली जाएगी। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसानों का भुगतान जल्द से जल्द किया जाए और भविष्य में ऐसी अनियमितताओं की पुनरावृत्ति न हो।
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