
Last updated: July 16th, 2026 at 05:13 pm
जबलपुर जिले के पाटन विकासखंड के ग्राम गाड़ाघाट में जब्त की गई संदिग्ध डीएपी खाद जांच में अमानक पाए जाने के बाद कृषि विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। प्रयोगशाला से आई रिपोर्ट में खाद गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरी, जिसके आधार पर आरोपी प्रकाश बर्मन के खिलाफ पाटन थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है। पुलिस ने उर्वरक नियंत्रण आदेश और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, ग्राम धनेटा के एक किसान ने एसडीएम पाटन मानवेन्द्र सिंह को शिकायत दी थी कि गाड़ाघाट गांव में नकली डीएपी खाद रखी गई है। शिकायत मिलते ही 3 जुलाई को राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर छापेमारी की। प्रारंभिक जांच के लिए नायब तहसीलदार रश्मि चौधरी और पटवारी सत्येन्द्र चौरसिया पहुंचे, जहां संदिग्ध खाद मिलने पर कृषि विभाग को सूचना दी गई।
अनुविभागीय कृषि अधिकारी डॉ. इंदिरा त्रिपाठी के निर्देश पर उर्वरक निरीक्षक पंकज कुमार श्रीवास्तव और वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी सीमा राउत की टीम ने प्रकाश बर्मन के घर पर दबिश दी। कार्रवाई के दौरान इफ्को कंपनी के नाम वाली 22 बोरियों में संदिग्ध डीएपी खाद बरामद हुई। मौके पर पंचनामा बनाकर सभी बोरियां जब्त की गईं और पाटन थाने में सुरक्षित जमा करा दी गईं।
जांच के दौरान इफ्को कंपनी के उप प्रबंधक ने बोरियों का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि कंपनी की असली बोरियों की सिलाई हरे धागे से होती है, जबकि जब्त बोरियों में सफेद धागे का इस्तेमाल किया गया था। इससे शुरुआती स्तर पर ही स्पष्ट हो गया कि पैकिंग संदिग्ध है और कंपनी की मूल पैकेजिंग से मेल नहीं खाती। इसके बाद खाद के नमूने उर्वरक परीक्षण प्रयोगशाला भेजे गए।
प्रयोगशाला जांच में खाद में नाइट्रोजन और फॉस्फोरस की मात्रा केवल 0.5-0.5 प्रतिशत पाई गई, जबकि मानक डीएपी उर्वरक में 18 प्रतिशत नाइट्रोजन और 46 प्रतिशत फॉस्फोरस होना आवश्यक है। रिपोर्ट आने के बाद कृषि विभाग ने खाद को अमानक घोषित करते हुए आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी। अधिकारियों का कहना है कि यदि यह नकली खाद किसानों तक पहुंच जाती तो फसलों की पैदावार पर गंभीर असर पड़ सकता था और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता।
पाटन पुलिस ने आरोपी प्रकाश बर्मन के खिलाफ उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है। अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि नकली डीएपी तैयार करने और उसकी सप्लाई में अन्य लोग भी शामिल थे या नहीं। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि इस तरह का कारोबार कब से चल रहा था और कितने किसानों तक यह खाद पहुंचाई गई।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि उर्वरक खरीदते समय बोरी की पैकिंग, सिलाई, बैच नंबर, निर्माता का नाम और अधिकृत विक्रेता के दस्तावेजों की अच्छी तरह जांच करें। यदि किसी खाद की गुणवत्ता या पैकेजिंग संदिग्ध लगे तो उसकी सूचना तुरंत कृषि विभाग या स्थानीय प्रशासन को दें। अधिकारियों का कहना है कि किसानों की सतर्कता से ही इस तरह के फर्जीवाड़े पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।
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