
जबलपुर से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित पाटन उपजेल की एक महिला जेल प्रहरी इन दिनों मानसिक तनाव और कथित उत्पीड़न का सामना कर रही है। महिला प्रहरी का आरोप है कि जेल की सुरक्षा ड्यूटी के दौरान नियमों का पालन करना उसके लिए परेशानी का कारण बन गया और पिछले दो वर्षों से वह लगातार दबाव और प्रताड़ना झेल रही है।
मामला अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, न्यायालय और बार काउंसिल तक पहुंच चुका है, जिसके बाद यह प्रकरण चर्चा का विषय बन गया है।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2024 में पाटन निवासी सौरभ व्यास नामक व्यक्ति कथित रूप से बिना अनुमति के पाटन उपजेल परिसर में प्रवेश कर गया था। उसी दौरान ड्यूटी पर तैनात महिला जेल प्रहरी ने सुरक्षा नियमों के तहत उससे पहचान पूछी और जेल परिसर में प्रवेश की अनुमति के बारे में जानकारी मांगी।
आरोप है कि इस बात से नाराज होकर संबंधित व्यक्ति ने महिला प्रहरी को धमकाया और कथित तौर पर कहा कि वह उसकी वर्दी उतरवा देगा।
महिला प्रहरी का आरोप है कि घटना के बाद से सौरभ व्यास और उसके कुछ साथी लगातार उसका पीछा करने लगे। इसके साथ ही उसके खिलाफ विभिन्न स्तरों पर झूठी शिकायतें भी की जाने लगीं।
पीड़िता का कहना है कि लगातार हो रही इन घटनाओं के कारण उसे किसी अनहोनी का भय सताने लगा और वह मानसिक रूप से परेशान रहने लगी।
इस संबंध में महिला जेल प्रहरी ने जेल प्रबंधन को लिखित शिकायत दी थी।
पाटन उपजेल के सहायक जेल अधीक्षक हेमेन्द्र बागरी के अनुसार महिला कर्मचारी की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए संबंधित जानकारी थाना पाटन भेजी गई थी।
हालांकि आरोप है कि शिकायत प्राप्त होने के बावजूद तत्काल कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया गया। पीड़ित पक्ष का कहना है कि कार्रवाई नहीं होने से आरोपियों के हौसले और बढ़ गए।
लगातार कथित उत्पीड़न से परेशान महिला जेल प्रहरी ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई।
बताया जा रहा है कि आयोग की पहल और हस्तक्षेप के बाद करीब दो वर्ष बाद थाना पाटन में महिला की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया।
इसके बाद पुलिस ने सौरभ व्यास को गिरफ्तार किया। हालांकि बाद में उसे थाने से जमानत दे दी गई और मामला न्यायालय में विचाराधीन है।
महिला प्रहरी ने आरोप लगाया है कि मामला कोर्ट में पहुंचने के बावजूद उस पर राजीनामा करने का दबाव बनाया जा रहा है।
उसका कहना है कि लगातार तनाव और दबाव के कारण उसकी मानसिक स्थिति प्रभावित हो रही है। इतना ही नहीं, वह अपनी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी ठीक से नहीं कर पा रही है।
इस पूरे घटनाक्रम ने महिला सुरक्षा और सरकारी कर्मचारियों के कार्यस्थल पर संरक्षण को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार सहायक जेल अधीक्षक हेमेन्द्र बागरी ने इस मामले को लेकर संबंधित मुख्यालय, न्यायालय और बार काउंसिल को भी लिखित शिकायत भेजी है।
शिकायत में महिला कर्मचारी की सुरक्षा, कथित दबाव और मामले की निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
यह मामला सामने आने के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि सुरक्षा व्यवस्था संभालने वाले कर्मचारियों को ही यदि अपने कर्तव्य निभाने पर मानसिक दबाव और उत्पीड़न का सामना करना पड़े तो ऐसी परिस्थितियों में कार्यस्थल की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में त्वरित जांच और निष्पक्ष कार्रवाई आवश्यक है ताकि सरकारी कर्मचारियों में सुरक्षा और विश्वास बना रहे।
फिलहाल मामला न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में पूरे प्रकरण में अंतिम स्थिति अदालत की सुनवाई और जांच प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि महिला जेल प्रहरी द्वारा लगाए गए आरोपों और प्रस्तुत शिकायतों पर आगे क्या कार्रवाई होती है और न्यायिक प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है।
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