
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने Kanha Tiger Reserve में लगातार हो रही बाघों की मौतों को गंभीरता से लेते हुए केंद्र और राज्य सरकार से विस्तृत जवाब तलब किया है। अदालत ने पूछा है कि कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) जैसे खतरनाक संक्रमण से बाघों की सुरक्षा के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कार्ययोजना तैयार की गई है।
बाघों की मौत के बढ़ते मामलों ने वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था और रोग नियंत्रण तंत्र को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यही वजह है कि अब यह मामला हाईकोर्ट की निगरानी में पहुंच गया है।
जस्टिस विवेक जैन और जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की वेकेशन बेंच ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA), मध्यप्रदेश शासन, वन विभाग समेत छह संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए हैं।
अदालत ने सभी पक्षों से विस्तृत जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई जून 2026 के अंतिम सप्ताह में निर्धारित की गई है।
यह मामला मुंबई निवासी अधिवक्ता और वन्यजीव संरक्षण कार्यकर्ता सुबित चक्रवर्ती द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से हाईकोर्ट पहुंचा है।
याचिका में दावा किया गया है कि 2 अप्रैल 2026 से अब तक कान्हा टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस संक्रमण के कारण 10 बाघों की मौत हो चुकी है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि संक्रमण को रोकने के लिए अपेक्षित स्तर पर कार्रवाई नहीं की गई।
याचिका में नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी की गाइडलाइन के अनुरूप एक स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच समिति गठित करने की मांग भी की गई है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि:
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि वन विभाग ने संक्रमण की गंभीरता और उससे निपटने के उपायों को लेकर पर्याप्त जानकारी सार्वजनिक नहीं की।
विशेष रूप से यह सवाल उठाया गया है कि:
इन सवालों के जवाब अब अदालत के सामने रखे जाएंगे।
याचिका में जिन बाघों की मौत का जिक्र किया गया है उनमें कई चर्चित बाघ और बाघिनें शामिल हैं।
इनमें प्रमुख हैं:
जानकारी के अनुसार अमाही और उसके शावकों को गंभीर हालत में रेस्क्यू कर क्वारंटाइन किया गया था। हालांकि इलाज और निगरानी के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
विशेषज्ञों के अनुसार कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) मुख्य रूप से संक्रमित कुत्तों से वन्यजीवों में फैलता है।
यह वायरस बाघों और अन्य मांसाहारी वन्यजीवों के:
को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संक्रमण की रोकथाम समय रहते नहीं की गई तो इसका असर अन्य टाइगर रिजर्व और वन्यजीव क्षेत्रों तक भी फैल सकता है।
देश के सबसे महत्वपूर्ण टाइगर रिजर्वों में शामिल कान्हा में कम समय के भीतर इतनी बड़ी संख्या में बाघों की मौत ने संरक्षण व्यवस्था पर चिंता बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस घटना ने कई अहम मुद्दों को सामने ला दिया है:
फिलहाल पूरे मामले पर वन्यजीव विशेषज्ञों, पर्यावरण प्रेमियों और संरक्षण संगठनों की नजर बनी हुई है। अब सबकी निगाहें जून के अंतिम सप्ताह में होने वाली अगली सुनवाई और सरकार की ओर से पेश किए जाने वाले जवाब पर टिकी हैं।
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद उम्मीद की जा रही है कि कान्हा में बाघों की मौत के कारणों और संक्रमण नियंत्रण की वास्तविक स्थिति को लेकर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
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