
जबलपुर में एक वृद्ध मां की पीड़ा ने अनुकंपा नियुक्ति व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पति और फिर इकलौते बेटे को खो चुकी बुजुर्ग महिला अब अपने भरण-पोषण के लिए संघर्ष कर रही है। परिवार का आरोप है कि बेटे की मौत के बाद बिना अन्य आश्रितों की सहमति के अनुकंपा नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार दीपक कुमार पटेल के पिता हाउसिंग बोर्ड में कार्यरत थे। वर्ष 2024 में उनके निधन के बाद परिवार पर आर्थिक संकट आ गया था। ऐसे में विभाग द्वारा मानवीय आधार पर दीपक पटेल को अनुकंपा नियुक्ति दी गई थी, ताकि परिवार की आर्थिक स्थिति संभल सके।
दीपक अपने परिवार की जिम्मेदारियां निभा रहे थे। इसी बीच उनका विवाह हुआ और वह अपनी पत्नी तथा वृद्ध मां के साथ रह रहे थे। परिवार का कहना है कि शादी के बाद घर में विवाद की स्थिति बनने लगी थी।
परिवार के अनुसार 8 अगस्त 2025 को दीपक पटेल की अचानक मृत्यु हो गई। मां और बहन का आरोप है कि घरेलू तनाव और मानसिक दबाव के चलते दीपक ने आत्महत्या जैसा कदम उठाया।
परिजनों का दावा है कि दीपक पर लगातार मां को अलग रखने का दबाव बनाया जा रहा था। हालांकि इस मामले में आधिकारिक रूप से किसी प्रकार की पुष्टि या जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है।
दीपक की मौत के बाद अब उनकी पत्नी को अनुकंपा नियुक्ति दिए जाने की प्रक्रिया चल रही है। इसी को लेकर परिवार ने आपत्ति दर्ज कराई है।
वृद्ध मां का कहना है कि:
मां का आरोप है कि यदि बहू को नियुक्ति मिल जाती है तो उनके जीवनयापन का संकट और गहरा सकता है।
परिवार ने इस मामले को लेकर विभागीय अधिकारियों और प्रशासन से शिकायत की है। साथ ही सीएम हेल्पलाइन में भी आवेदन दिया गया है। परिजनों का कहना है कि अब तक उन्हें कोई ठोस जवाब या राहत नहीं मिली है।
इस पूरे मामले ने अनुकंपा नियुक्ति की प्रक्रिया और आश्रितों के अधिकारों को लेकर बहस छेड़ दी है। लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि ऐसी परिस्थितियों में वृद्ध माता-पिता की सुरक्षा और भरण-पोषण सुनिश्चित करने के लिए क्या व्यवस्था है।
अनुकंपा नियुक्ति का मकसद सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके आश्रित परिवार को आर्थिक सहारा देना होता है। लेकिन कई मामलों में परिवार के भीतर अधिकार और आश्रितों को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में सभी आश्रितों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए, ताकि किसी भी जरूरतमंद सदस्य के साथ अन्याय न हो।
जबलपुर का यह मामला अब सामाजिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बनता जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वृद्ध मां की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
अब देखना होगा कि विभाग और प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और क्या वृद्ध मां को राहत मिल पाती है या नहीं।
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