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सिहोरा में बंद फैक्ट्री में फिर बन रहे थे पानी पाउच, खाद्य विभाग ने मारा छापा

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जबलपुर के सिहोरा क्षेत्र में खाद्य विभाग की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक बंद पड़ी फैक्ट्री में छापा
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जबलपुर के सिहोरा क्षेत्र में खाद्य विभाग की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक बंद पड़ी फैक्ट्री में छापा मारा, जहां कथित रूप से अवैध रूप से पानी पाउच का निर्माण किया जा रहा था। जांच के दौरान फैक्ट्री से लगभग 2500 पानी पाउच जब्त किए गए और उत्पादन प्रक्रिया को तत्काल बंद कर दिया गया।

कार्रवाई के बाद फैक्ट्री को सील कर दिया गया है। मामले ने एक बार फिर खाद्य सुरक्षा और दूषित पेयजल निर्माण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पहले भी बंद की जा चुकी थी फैक्ट्री

जानकारी के अनुसार, संबंधित फैक्ट्री पर पहले भी कार्रवाई की जा चुकी थी। उस समय जांच में पाया गया था कि फैक्ट्री में गंदगी और दूषित वातावरण के बीच पानी पाउच तैयार किए जा रहे थे।

स्वास्थ्य मानकों का उल्लंघन पाए जाने के बाद विभाग ने फैक्ट्री को बंद कर दिया था। लेकिन हाल ही में खाद्य एवं औषधि विभाग को सूचना मिली कि शादी सीजन में बढ़ती मांग को देखते हुए एक बार फिर यहां पानी पाउच का उत्पादन शुरू कर दिया गया है।

छापेमारी में मिले हजारों पानी पाउच

सूचना मिलने के बाद खाद्य विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर फैक्ट्री में छापा मारा। जांच के दौरान वहां बड़ी मात्रा में पानी पाउच पाए गए। अधिकारियों ने लगभग 2500 पानी पाउच जब्त कर लिए।

इसके साथ ही उत्पादन प्रक्रिया को तत्काल रोकते हुए फैक्ट्री को दोबारा सील कर दिया गया।

दूषित वातावरण में हो रहा था निर्माण

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि फैक्ट्री में साफ-सफाई और स्वच्छता के मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था। विशेषज्ञों के अनुसार, दूषित वातावरण में तैयार किए गए पानी पाउच लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।

खाद्य सुरक्षा मानकों के तहत पेयजल निर्माण इकाइयों में स्वच्छता, शुद्ध जल स्रोत और उचित पैकेजिंग व्यवस्था अनिवार्य होती है।

फैक्ट्री मालिक पर भी नजर

बताया जा रहा है कि फैक्ट्री का संचालन मयंक त्रिपाठी द्वारा किया जा रहा था। फिलहाल विभाग मामले की विस्तृत जांच कर रहा है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बंदी के बावजूद फैक्ट्री दोबारा कैसे शुरू की गई।

संभावना जताई जा रही है कि जांच के बाद संबंधित संचालकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

शादी सीजन में बढ़ती मांग का उठाया फायदा?

अधिकारियों का मानना है कि शादी और समारोहों के सीजन में पानी पाउच की बढ़ती मांग का फायदा उठाने के लिए फैक्ट्री को फिर से चालू किया गया था।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे समय में अवैध और बिना मानक वाले खाद्य एवं पेय पदार्थों का कारोबार तेजी से बढ़ता है, जिससे लोगों की सेहत खतरे में पड़ सकती है।

स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

इस कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों में भी चिंता बढ़ गई है कि दूषित वातावरण में तैयार पानी पाउच कहीं बाजार में तो नहीं पहुंच गए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से पैकेज्ड पानी खरीदते समय ब्रांड, गुणवत्ता और पैकेजिंग की जांच करने की सलाह दी है।

निष्कर्ष

सिहोरा में खाद्य विभाग की कार्रवाई ने एक बार फिर अवैध खाद्य एवं पेय पदार्थ निर्माण के नेटवर्क को उजागर किया है। दूषित वातावरण में तैयार हो रहे पानी पाउच न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा साबित हो सकते हैं। अब सभी की नजर विभागीय जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर टिकी है।

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