
Last updated: May 18th, 2026 at 05:50 pm
जबलपुर में स्कूली बच्चों के भारी बस्तों को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। बच्चों की सेहत और शारीरिक विकास को ध्यान में रखते हुए लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को निर्देश जारी किए हैं कि जिले के सभी स्कूलों में नेशनल स्कूल बैग पॉलिसी का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराया जाए।
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि तय मानकों से अधिक वजन वाले बैग मिलने पर संबंधित स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
नई गाइडलाइन के अनुसार, पहली कक्षा के बच्चों के स्कूल बैग का वजन 1078 ग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए। यह कदम छोटे बच्चों पर पढ़ाई के बढ़ते शारीरिक दबाव को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कम उम्र में भारी स्कूल बैग ढोने से बच्चों की रीढ़, कंधों और शारीरिक विकास पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
डीपीआई द्वारा जारी निर्देशों में कहा गया है कि सभी सरकारी और निजी स्कूलों को नेशनल बैग पॉलिसी के नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।
स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि:
प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि कोई स्कूल तय मानकों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग को स्कूलों में नियमित निरीक्षण कर बैग पॉलिसी के पालन की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।
पिछले कुछ वर्षों में लगातार यह शिकायतें सामने आ रही थीं कि छोटे बच्चों को जरूरत से ज्यादा किताबें और कॉपियां स्कूल लानी पड़ती हैं, जिससे उनके बैग का वजन काफी बढ़ जाता है।
डॉक्टरों और शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक भारी बैग उठाने से बच्चों में पीठ दर्द, कंधे की समस्या और शारीरिक थकान जैसी परेशानियां बढ़ सकती हैं।
प्रशासन के इस फैसले का कई अभिभावकों ने स्वागत किया है। उनका कहना है कि छोटे बच्चों पर पढ़ाई का बढ़ता बोझ चिंता का विषय बन चुका था और अब इस दिशा में सख्ती जरूरी थी।
अभिभावकों को उम्मीद है कि नई व्यवस्था लागू होने से बच्चों को राहत मिलेगी और उनका मानसिक एवं शारीरिक विकास बेहतर तरीके से हो सकेगा।
जबलपुर में नेशनल स्कूल बैग पॉलिसी को सख्ती से लागू करने का निर्णय बच्चों की सेहत और शिक्षा व्यवस्था दोनों के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब यह देखना अहम होगा कि स्कूल प्रशासन इन निर्देशों का पालन कितनी गंभीरता से करता है और क्या वास्तव में बच्चों के बैग का बोझ कम हो पाता है।
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