
Last updated: May 16th, 2026 at 03:35 pm
जबलपुर में मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र को लेकर चल रहे मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। हाईकोर्ट में हुई महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से मंत्री प्रतिमा बागरी के कास्ट सर्टिफिकेट की जांच कराने का आश्वासन दिया गया।
मामले में अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 60 दिनों के भीतर जांच प्रक्रिया पूरी की जाए। इस फैसले के बाद राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।
जबलपुर स्थित हाईकोर्ट में इस मामले पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र की जांच उच्च स्तरीय छानबीन समिति द्वारा कराई जाएगी।
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि जांच प्रक्रिया के तहत मंत्री प्रतिमा बागरी को भी तलब किया जाएगा और संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाएगी।
हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए निर्देश दिए कि निर्धारित समयसीमा के भीतर जांच पूरी की जाए। अदालत ने कहा कि 60 दिन के अंदर जांच रिपोर्ट तैयार की जाए।
साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि तय समय में जांच पूरी नहीं होती है, तो मामले में दोबारा सुनवाई की जाएगी। अदालत के इस निर्देश के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल बढ़ गई है।
यह पूरा मामला कांग्रेस नेता प्रदीप अहिरवार द्वारा दायर याचिका से जुड़ा हुआ है। याचिका में मंत्री प्रतिमा बागरी के SC कास्ट सर्टिफिकेट को चुनौती दी गई थी।
याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया था कि प्रतिमा बागरी अनुसूचित जाति की नहीं बल्कि राजपूत समाज से संबंध रखती हैं। इसी आधार पर उनके जाति प्रमाण पत्र की वैधता पर सवाल उठाए गए थे।
अब हाईकोर्ट के निर्देश के बाद पूरे मामले की जांच उच्च स्तरीय समिति के माध्यम से की जाएगी। माना जा रहा है कि समिति दस्तावेजों, रिकॉर्ड और अन्य तथ्यों की विस्तार से जांच करेगी।
जांच के दौरान संबंधित पक्षों के बयान भी लिए जा सकते हैं। फिलहाल इस मामले को लेकर राजनीतिक हलकों में लगातार चर्चा बनी हुई है।
मंत्री प्रतिमा बागरी का मामला सामने आने के बाद विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों की नजरें इस जांच पर टिकी हुई हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद मामले में आगे की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
वहीं सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर लोगों के बीच चर्चा जारी है।
हाईकोर्ट ने फिलहाल जांच प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि उच्च स्तरीय समिति अपनी जांच में क्या निष्कर्ष निकालती है।
यदि निर्धारित अवधि में जांच पूरी नहीं होती या रिपोर्ट पर सवाल उठते हैं, तो मामला फिर से अदालत में सुनवाई के लिए आ सकता है।
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