
Last updated: October 9th, 2026 at 03:56 pm
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में कटनी की निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया से जुड़े कथित जमीन सौदे के मामले में नया घटनाक्रम सामने आया है। मामले के शिकायतकर्ता परिक्रमा वासी वन प्रस्थी महंत मनीद्वीपम अविनाश तिवारी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर पूरे प्रकरण की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग की है।
वहीं, नेहा पच्चीसिया ने अपने खिलाफ कटनी के कुठला थाने में दर्ज एफआईआर को निरस्त करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। दोनों याचिकाओं पर अब एक साथ सुनवाई होगी।
गुरुवार को जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस रामकुमार चौबे की डिवीजन बेंच के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत को बताया गया कि नेहा पच्चीसिया की याचिका के अलावा शिकायतकर्ता की ओर से CBI जांच की मांग वाली याचिका भी दाखिल की गई है।
दोनों याचिकाएं एक ही प्रकरण से संबंधित होने के कारण डिवीजन बेंच ने इन्हें लिंक करने के निर्देश दिए। अब एफआईआर निरस्त करने और मामले की CBI जांच कराने की मांग वाली याचिकाओं पर 12 अक्टूबर को एक साथ सुनवाई निर्धारित की गई है।
यह मामला कटनी के कुठला थाने में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। पुलिस ने नेहा पच्चीसिया सहित अन्य लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश समेत विभिन्न आरोपों के तहत प्रकरण दर्ज किया है।
आरोप है कि हत्या के एक मामले में निर्धारित समय के भीतर चालान पेश नहीं होने के कारण संबंधित आरोपी को डिफॉल्ट जमानत का लाभ मिला था। इसके बाद इस मामले से जुड़े लोगों पर करीब एक करोड़ रुपये मूल्य की जमीन को कथित तौर पर 15 से 20 लाख रुपये में खरीदने का आरोप लगा।
मामले में जमीन के सौदे और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच की गई। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष आना बाकी है।
पिछली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत में नेहा पच्चीसिया के विदेश जाने की आशंका जताई गई थी। रिपोर्टों के अनुसार, सरकार ने उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी करने की तैयारी की जानकारी भी दी थी।
मामले की सुनवाई के दौरान नेहा पच्चीसिया की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल खरे उपस्थित रहे। राज्य सरकार की ओर से भी अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा।
हाईकोर्ट के दोनों याचिकाओं को लिंक करने के निर्देश के बाद अब 12 अक्टूबर की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। अदालत में एक ओर एफआईआर निरस्त करने की मांग पर विचार होगा, वहीं दूसरी ओर कथित जमीन सौदे की जांच CBI को सौंपने की मांग भी सामने रहेगी।
फिलहाल CBI जांच को लेकर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। अदालत में सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा कि इन याचिकाओं पर आगे क्या रुख अपनाया जाता है।
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