
Last updated: September 29th, 2026 at 01:44 pm
जबलपुर। आयुष्मान भारत योजना के तहत भर्ती एक मरीज के परिजनों से कथित तौर पर ₹25 हजार अतिरिक्त राशि मांगने का मामला सामने आया है। वायरल ऑडियो और वीडियो का संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने आशीष अस्पताल के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। भोपाल से मिले निर्देशों के बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नवीन कोठारी ने मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय समिति गठित की है।
मामले में आरोप है कि अस्पताल से जुड़े अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. अंकुर बंसल ने आयुष्मान भारत योजना के एक लाभार्थी के उपचार के लिए मरीज के परिजनों से योजना के बाहर अतिरिक्त राशि की मांग की।
वायरल ऑडियो और वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले को संज्ञान में लिया और आरोपों की जांच के निर्देश दिए। फिलहाल विभाग की जांच पूरी नहीं हुई है, इसलिए आरोपों की पुष्टि होना बाकी है।
मामले की जांच के लिए विक्टोरिया जिला अस्पताल के आयुष्मान नोडल अधिकारी डॉ. वर्मा और अस्पताल प्रबंधक अरुण शाह को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
जांच टीम ने अस्पताल पहुंचकर संबंधित मरीज की फाइल, केस शीट और उपचार से जुड़े दस्तावेज अपने कब्जे में लिए हैं। समिति अब मरीज के उपचार से जुड़े रिकॉर्ड और वायरल रिकॉर्डिंग सहित अन्य तथ्यों की जांच कर रही है।
जांच के दौरान समिति मरीज के अस्पताल में भर्ती होने की तारीख, बीमारी, किए गए उपचार और ऑपरेशन करने वाले चिकित्सक से संबंधित जानकारी जुटा रही है।
इसके साथ ही वायरल ऑडियो और वीडियो की प्रामाणिकता की भी जांच की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग यह भी देख रहा है कि मरीज का उपचार आयुष्मान योजना के तहत किस पैकेज के अंतर्गत किया गया था और उससे संबंधित रिकॉर्ड में क्या जानकारी दर्ज है।
रविवार को अस्पताल के निरीक्षण के दौरान अस्पताल का आयुष्मान मित्र उपलब्ध नहीं था। इसके कारण पोर्टल पर दर्ज रिकॉर्ड का विस्तृत परीक्षण उस समय पूरा नहीं हो सका।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार डिजिटल रिकॉर्ड की जांच अभी जारी है। पोर्टल पर दर्ज उपचार और योजना से जुड़े विवरणों को भी जांच रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार आयुष्मान भारत योजना में सूचीबद्ध अस्पतालों को स्वीकृत पैकेज के दायरे में पात्र मरीजों को कैशलेस उपचार उपलब्ध कराना होता है।
यदि जांच में मरीज के परिजनों से योजना के बाहर अतिरिक्त राशि मांगने के आरोप प्रमाणित होते हैं, तो अस्पताल के आयुष्मान पंजीयन को निलंबित या निरस्त करने के साथ लाइसेंस संबंधी कार्रवाई भी की जा सकती है।
फिलहाल अस्पताल और संबंधित चिकित्सक का विस्तृत पक्ष सामने नहीं आया है। स्वास्थ्य विभाग की अंतिम कार्रवाई जांच समिति की रिपोर्ट और सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर तय होगी।
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