
Last updated: September 17th, 2026 at 04:05 pm
रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में फोर्थ सेमेस्टर की हिंदी परीक्षा के दौरान गलत प्रश्नपत्र मिलने का मामला सामने आया है। छात्रों का आरोप है कि उन्हें आउट ऑफ सिलेबस प्रश्नपत्र दिया गया, जिसके बाद परीक्षा केंद्रों पर जमकर हंगामा हुआ।
मामला बढ़ने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से परीक्षा को कैंसिल किए जाने की जानकारी सामने आई है। परीक्षा में शामिल होने पहुंचे छात्रों ने अब पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करने के साथ जनरल प्रमोशन देने की मांग उठाई है।
जानकारी के मुताबिक, फोर्थ सेमेस्टर की हिंदी परीक्षा सुबह करीब 7 बजे आयोजित की गई थी। परीक्षा में शामिल होने के लिए 500 से ज्यादा विधि छात्र पहुंचे थे।
छात्रों को जब प्रश्नपत्र दिया गया तो उन्होंने पेपर को लेकर आपत्ति जताई। छात्रों का आरोप था कि प्रश्नपत्र निर्धारित सिलेबस के अनुरूप नहीं था।
प्रश्नपत्र को लेकर छात्रों के बीच नाराजगी बढ़ती गई। छात्रों ने परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए विरोध शुरू कर दिया।
छात्रों का कहना है कि उन्होंने परीक्षा की तैयारी निर्धारित पाठ्यक्रम के आधार पर की थी। ऐसे में यदि प्रश्नपत्र पाठ्यक्रम से अलग है तो विद्यार्थियों के लिए परीक्षा देना मुश्किल हो जाता है।
हंगामे की स्थिति को देखते हुए मामले को विश्वविद्यालय प्रशासन के संज्ञान में लाया गया।
छात्रों के विरोध और प्रश्नपत्र को लेकर उठी आपत्ति के बाद परीक्षा कैंसिल किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, प्रश्नपत्र में वास्तव में कितने प्रश्न सिलेबस से बाहर थे और प्रश्नपत्र तैयार करने में किस स्तर पर गलती हुई, यह विश्वविद्यालय की जांच के बाद स्पष्ट होगा।
फिलहाल छात्रों के बीच इस बात को लेकर नाराजगी है कि परीक्षा देने के लिए सुबह-सुबह पहुंचने के बावजूद उन्हें परीक्षा नहीं देनी पड़ी।
परीक्षा कैंसिल होने के बाद छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने जनरल प्रमोशन की मांग रखी है। छात्रों का कहना है कि प्रश्नपत्र से जुड़ी गलती उनकी ओर से नहीं हुई है, इसलिए इसका नुकसान विद्यार्थियों को नहीं उठाना चाहिए।
छात्रों ने मामले की जांच कराने और उनके हित में उचित निर्णय लेने की मांग की है।
पूरे मामले में अब विश्वविद्यालय प्रशासन के आधिकारिक निर्णय का इंतजार है। परीक्षा कैंसिल होने के बाद नई परीक्षा कब आयोजित होगी, छात्रों को जनरल प्रमोशन दिया जाएगा या कोई अन्य व्यवस्था की जाएगी, इस संबंध में आगे विश्वविद्यालय की ओर से स्थिति स्पष्ट की जानी है।
प्रश्नपत्र को आउट ऑफ सिलेबस बताए जाने की बात फिलहाल छात्रों के आरोप पर आधारित है। विश्वविद्यालय की ओर से प्रश्नपत्र की औपचारिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि परीक्षा में किस स्तर की लापरवाही हुई।
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