
Last updated: September 17th, 2026 at 11:39 am
रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (RDVV) में हिंदी विषय के प्रश्नपत्र को लेकर छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों ने आरोप लगाया कि परीक्षा में आउट ऑफ सिलेबस प्रश्न पूछे गए, जिसके चलते कई छात्र परीक्षा के दौरान ही बाहर निकल आए और अपनी शिकायत लेकर कुलपति निवास पहुंच गए।
सुबह करीब 7 बजे शुरू हुई परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र मिलने के बाद छात्रों के बीच नाराजगी देखने को मिली। छात्रों का कहना है कि प्रश्नपत्र निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुरूप नहीं था, जिससे उन्हें परीक्षा देने में परेशानी का सामना करना पड़ा।
छात्रों के मुताबिक, परीक्षा शुरू होने के बाद जब उन्होंने हिंदी का प्रश्नपत्र देखा तो उसमें ऐसे प्रश्न शामिल होने की बात सामने आई, जिन्हें वे निर्धारित पाठ्यक्रम से बाहर का बता रहे हैं।
इसी को लेकर कुछ छात्रों ने परीक्षा छोड़ दी और परीक्षा केंद्र से बाहर निकलकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। छात्रों का कहना है कि जब पेपर ही पाठ्यक्रम के अनुरूप नहीं है तो उनके प्रदर्शन का मूल्यांकन किस आधार पर होगा, इसे लेकर भी चिंता बनी हुई है।
परीक्षा छोड़ने के बाद छात्र अपनी शिकायत लेकर कुलपति निवास पहुंचे। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने प्रश्नपत्र को लेकर अपनी आपत्ति रखी और मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की।
छात्रों का कहना है कि परीक्षा से पहले निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार तैयारी की गई थी। ऐसे में कथित तौर पर सिलेबस से अलग प्रश्न आने से उन्हें परेशानी हुई।
छात्रों के साथ NSUI प्रभारी अचल नाथ भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने छात्रों की शिकायत का समर्थन करते हुए परीक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए और विश्वविद्यालय प्रशासन से मामले की जांच की मांग की।
विरोध के दौरान छात्रों ने प्रश्नपत्र की जांच कराने और यदि प्रश्न पाठ्यक्रम से बाहर पाए जाते हैं तो छात्रों के हित में उचित निर्णय लेने की मांग रखी।
छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की कि प्रश्नपत्र को निर्धारित पाठ्यक्रम के आधार पर जांचा जाए। उनका कहना है कि परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों को कथित आउट ऑफ सिलेबस प्रश्नों के कारण नुकसान नहीं होना चाहिए।
फिलहाल छात्रों की शिकायत और प्रश्नपत्र की वास्तविक स्थिति की आधिकारिक पुष्टि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस जानकारी में उपलब्ध नहीं है। प्रश्नपत्र की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कितने प्रश्न निर्धारित पाठ्यक्रम से बाहर थे और परीक्षा परिणाम पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।
अब छात्रों की नजर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस मामले में लिए जाने वाले निर्णय पर है।
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