होमअपराधकृषि मंडी में प्रवेश पर्ची के नाम पर लाखों की वसूली का आरोप, 10 रुपये शुल्क लेकर पर्ची में दिखाया जा रहा शून्य

कृषि मंडी में प्रवेश पर्ची के नाम पर लाखों की वसूली का आरोप, 10 रुपये शुल्क लेकर पर्ची में दिखाया जा रहा शून्य

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संभाग की सबसे बड़ी कृषि उपज मंडी में प्रवेश पर्ची के नाम पर कथित अनियमित वसूली का मामला सामने आया
कृषि मंडी में प्रवेश पर्ची के नाम पर लाखों की वसूली का आरोप, देखें वीडियो

संभाग की सबसे बड़ी कृषि उपज मंडी में प्रवेश पर्ची के नाम पर कथित अनियमित वसूली का मामला सामने आया है। आरोप है कि मंडी में फसल लेकर आने वाले किसानों से प्रति ढेर 10 रुपये प्रवेश शुल्क लिया जा रहा है, लेकिन इसके बदले दी जा रही पर्ची में शुल्क की राशि शून्य दर्ज की जा रही है। इस व्यवस्था का वीडियो सामने आने के बाद मंडी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।

आरोप है कि यह मामला किसी एक दिन की व्यवस्था नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रहा है। मंडी में फसल लेकर पहुंचने वाले किसानों से उनके वाहन और फसल की जानकारी लेकर पर्ची तैयार की जाती है। किसान से शुल्क के नाम पर राशि लेने के बाद उसे ऐसी पर्ची दी जाती है, जिसमें शुल्क वाले कॉलम में शून्य लिखा रहता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि किसानों से ली जा रही राशि आखिर किस मद में जमा हो रही है।

वाहन प्रवेश के नाम पर कटती है पर्ची

कृषि उपज मंडी में फसल लेकर आने वाले वाहनों को प्रवेश के समय पर्ची दी जाती है। इस पर्ची में किसान का नाम, स्थान और मोबाइल नंबर सहित फसल से संबंधित जानकारी दर्ज की जाती है। आरोप है कि फसल के ढेर के हिसाब से 10 रुपये की राशि ली जा रही है।

पर्ची में शुल्क के लिए अलग कॉलम भी मौजूद है, लेकिन उसमें कथित तौर पर शुल्क शून्य दर्ज किया जा रहा है। यही व्यवस्था अब पूरे मामले का सबसे अहम बिंदु बन गई है। यदि किसानों से राशि ली जा रही है तो पर्ची पर उसका उल्लेख क्यों नहीं किया जा रहा, यह जांच का विषय है।

कम पढ़े-लिखे किसानों से वसूली का आरोप

मंडी में आने वाले कई किसान ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं। आरोप है कि प्रवेश द्वार पर तैनात कर्मचारी किसानों की इसी स्थिति का फायदा उठा रहे हैं। किसानों से पहले राशि ले ली जाती है और इसके बाद बिना शुल्क दर्शाई गई पर्ची उनके हाथ में थमा दी जाती है।

कथित व्यवस्था के तहत कर्मचारी किसान से उसकी फसल और वजन की जानकारी लेते हैं। इसके बाद फसल के ढेर की संख्या के आधार पर प्रवेश शुल्क की राशि बताई जाती है। किसान राशि जमा कर देता है, लेकिन उसे मिलने वाली पर्ची में शुल्क की रकम दर्ज नहीं होने का आरोप है।

एक वाहन नहीं, हर ढेर पर 10 रुपये का आरोप

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह सामने आई है कि शुल्क केवल वाहन के प्रवेश के आधार पर नहीं, बल्कि फसल के प्रत्येक ढेर के हिसाब से लिए जाने का आरोप है।

यानी यदि किसी किसान के वाहन में फसल के एक से अधिक ढेर हैं, तो प्रत्येक ढेर पर अलग से 10 रुपये लिए जाने की बात कही जा रही है। ऐसे में बड़ी मात्रा में फसल लेकर मंडी पहुंचने वाले वाहनों से कुल वसूली बढ़ जाती है।

रोजाना एक से डेढ़ हजार वाहन आने का दावा

मंडी से जुड़े जानकारों के अनुसार सामान्य दिनों में गेट से प्रतिदिन करीब एक हजार से डेढ़ हजार छोटे-बड़े वाहन प्रवेश करते हैं। इन वाहनों में अनाज, सब्जियां, टमाटर, फल और अन्य कृषि उपज लेकर किसान और व्यापारी पहुंचते हैं।

वहीं सीजन के दौरान वाहनों की संख्या बढ़कर करीब दो से ढाई हजार प्रतिदिन तक पहुंचने का दावा किया गया है। यदि प्रवेश पर्ची के नाम पर प्रत्येक वाहन अथवा फसल के ढेर से राशि वसूली जा रही है, तो प्रतिदिन बड़ी रकम जमा होने की संभावना है।

10 रुपये के हिसाब से लाखों की गणना

सामने आए आरोपों के आधार पर यदि केवल एक हजार वाहनों से प्रतिदिन 10 रुपये लिए जाने की गणना की जाए तो यह रकम 10 हजार रुपये प्रतिदिन बैठती है। इसी आधार पर महीने में करीब 3 लाख रुपये और सालभर में करीब 36 लाख रुपये की राशि बनती है।

हालांकि, यह गणना केवल उपलब्ध आरोपों और प्रतिदिन एक हजार वाहनों की अनुमानित संख्या पर आधारित है। वास्तविक राशि कितनी है, यह मंडी के आधिकारिक रिकॉर्ड, प्रवेश पर्चियों, वाहन संख्या और जमा किए गए शुल्क की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।

सीजन में यदि वाहनों की संख्या दो से ढाई हजार तक पहुंचती है और प्रति ढेर अलग शुल्क लिया जाता है, तो कथित वसूली की राशि इससे कहीं अधिक भी हो सकती है।

पर्ची में शुल्क शून्य, फिर पैसा किस खाते में?

पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि किसानों से प्रवेश शुल्क के नाम पर पैसे लिए जा रहे हैं तो पर्ची में शुल्क की राशि शून्य क्यों दिखाई जा रही है।

यदि यह राशि सरकारी राजस्व के रूप में निर्धारित है तो उसका रिकॉर्ड और रसीद में उल्लेख होना चाहिए। वहीं यदि राशि किसी अन्य निर्धारित मद में ली जा रही है तो उसकी भी स्पष्ट जानकारी किसानों को मिलनी चाहिए। पर्ची में शून्य दर्ज होने और किसान से नकद राशि लेने के बीच का अंतर अब जांच का मुख्य विषय बन गया है।

गेट नंबर-1 पर किसानों की लगती है लाइन

बताया गया है कि मंडी के गेट नंबर-1 पर बने चेक प्वाइंट के पास कार्यालय संचालित है। यहां प्रवेश पर्ची कटवाने के लिए किसानों की लाइन लगती है। किसान अपना वाहन गेट पर खड़ा करके पर्ची बनवाने के लिए खिड़की तक पहुंचते हैं।

आरोप है कि इसी दौरान किसान का नाम, पता, मोबाइल नंबर और फसल का वजन पूछा जाता है। इसके बाद शुल्क बताया जाता है और राशि लेने के बाद पर्ची दे दी जाती है। पर्ची में शुल्क का कॉलम होने के बावजूद उसमें शून्य दर्ज होने का दावा किया जा रहा है।

वीडियो में किसान ने बताई शुल्क की जानकारी

मामले से जुड़े वीडियो में एक किसान से प्रवेश शुल्क के संबंध में सवाल किया गया। बातचीत में किसान से पूछा गया कि मंडी में अनाज लाने पर पैसे लगते हैं या नहीं। किसान ने बताया कि पैसे लगते हैं।

जब उससे पूछा गया कि कितने पैसे लगते हैं तो उसने 10 रुपये बताया। आगे पूछे जाने पर किसान ने स्पष्ट किया कि यह रकम केवल एक वाहन के लिए नहीं, बल्कि हर ढेर के हिसाब से 10 रुपये ली जाती है।

यह बातचीत सामने आने के बाद मंडी में प्रवेश पर्ची की व्यवस्था को लेकर सवाल और गंभीर हो गए हैं।

मंडी प्रशासन के जवाब पर भी सवाल

मामले में मंडी प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आरोपों के संबंध में प्रशासन की ओर से स्पष्ट और विस्तृत जवाब सामने आना बाकी है। यदि प्रवेश शुल्क की व्यवस्था निर्धारित नियमों के तहत है तो किसानों से ली जाने वाली राशि, पर्ची पर दर्ज शुल्क और सरकारी खाते में जमा रकम का पूरा रिकॉर्ड सामने रखा जाना चाहिए।

वहीं यदि बिना रसीद या बिना शुल्क दर्शाए किसानों से राशि ली जा रही है तो यह गंभीर प्रशासनिक और वित्तीय जांच का विषय बन सकता है।

जांच हुई तो सामने आ सकती है पूरी तस्वीर

पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए मंडी के गेट पर आने वाले वाहनों की संख्या, जारी की गई प्रवेश पर्चियों, पर्चियों में दर्ज शुल्क, किसानों से ली गई राशि और सरकारी खाते में जमा राजस्व का मिलान किया जाना जरूरी है।

इसके अलावा सीसीटीवी फुटेज और कर्मचारियों की ड्यूटी से जुड़े रिकॉर्ड की जांच भी की जा सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किसानों से वास्तव में कितनी राशि ली जा रही थी और उस राशि का आधिकारिक लेखा-जोखा मौजूद है या नहीं।

फिलहाल प्रवेश पर्ची के नाम पर किसानों से 10 रुपये लेने और पर्ची में शुल्क शून्य दिखाने के आरोप ने कृषि मंडी की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोपों की वास्तविकता और कथित वित्तीय अनियमितता की पुष्टि आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकेगी।

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